समदर्शी

शब्द मेरे साथी हैं, खामोशी मेरे गुरु

जीवन और संबंधों पर दार्शनिक विचार दर्शाता प्रतीकात्मक चित्र

जीवन और संबंध

मनुष्य का जीवन संबंधों के ताने-बाने में बुना हुआ एक विस्तृत गलीचा है—रंगों, ध्वनियों और स्मृतियों से भरा हुआ। यह गलीचा तभी अर्थपूर्ण हो उठता है जब इसके धागे प्रेम, भरोसे और सहजता से पिरोए गए हों। संबंधों का महत्व मनुष्य की मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक उन्नति में उतना ही अनिवार्य है जितना श्वास का…

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चेहरे जिंदगी के

चेहरे जिंदगी के – यह हिंदी कविता जीवन की दोहरी भावनाओं, हँसी और खामोशी, उजाले और अंधेरे के बीच झूलते अनुभवों को शब्द देती है। पढ़िए MyHindagi.com पर।

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चुनाव पर व्यंग्य चित्र – राजनीति के प्रलोभन और जुगाड़ पर आधारित इलस्ट्रेशन

वादों की शहनाई

जैसे ही आचार संहिता की घोषणा होती है, नेता मौन साध लेते हैं—मानो तपस्या में लीन साधु हों। पर यह तपस्या सत्ता तक पहुँचने का ‘प्रवेश यज्ञ’ होती है। लेकिन जैसे ही चुनावी बिगुल बजता है, वही मौन माइक पकड़ लेता है और शोर का तीर्थ आरंभ हो जाता है। हर गली में मंच, हर…

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दो बैलों की कथा

लेखक – मुंशी प्रेमचंद झुरी के पास दो बैल थे, जिनका नाम हीरा और मोती था। दोनों बैल बहुत ही हट्टे – कट्टे और आकर्षक थे, काम करने में भी वो बहुत ही फुर्तीले थे। काफी समय से साथ रहते रहते हीरा और मोती अच्छे दोस्त बन गए थे, वो एक ही नाद से चारा…

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काबुलीवाला

लेखक – रवीन्द्रनाथ टैगोर  मेरी पाँच बरस की छोटी लड़की मिनी क्षण-भर भी बात किए बिना नहीं रह सकती। जन्म लेने के बाद भाषा सीखने में उसने सिर्फ़ एक ही साल लगाया होगा। उसके बाद जब तक वह जगी किंतु मैं ऐसा नहीं कर पाता। मिनी का चुप रहना मुझे इतना अस्वाभाविक लगता है कि…

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यमलोक की तकनीकी भूल

एक बार, शायद दीपावली के कुछ ही दिन बाद की बात होगी।तारीख़ अब ठीक-ठीक याद नहीं,पर जो हुआ, वह यमलोक के इतिहास में दर्ज हो गया —“यमलोक की तकनीकी भूल” के नाम से। गोवर्धनपुर का एक आदमी था — गिरधारी।सीधा, ईमानदार, और इतना विनम्र कि उसकी भलमनसाहतगाँव वालों को असहज कर देती थी।वह कभी किसी…

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निराला का चित्र

महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – जीवन, रचनाएँ और साहित्यिक योगदान

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ आधुनिक हिंदी साहित्य के ऐसे महत्त्वपूर्ण कवि थे जिन्होंने कविता को छंदों की परंपरागत सीमाओं से मुक्त कर उसे जीवन के यथार्थ, सामाजिक संघर्ष और मानव-पीड़ा की अभिव्यक्ति बना दिया। उनमें जीवन के कठिन यथार्थ, सामाजिक संघर्षों और दलित-शोषित वर्ग की पीड़ा का सजीव चित्रण किया |उनकी कविताओं में ओज और करुणा,…

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“प्रेमचंद: हिंदी कथा-साहित्य के युगपुरुष”

जब-जब हिंदी साहित्य की चर्चा होती है, तब-तब प्रेमचंद का नाम श्रद्धा, सम्मान और आदर के साथ लिया जाता है।उनका काल हिंदी कथा-साहित्य का स्वर्णयुग माना जाता है।वे केवल एक कथाकार या उपन्यासकार ही नहीं, बल्कि यथार्थ के महामार्ग पर चलने वाले एक महामानव थे, जिन्होंने समाज में व्याप्त दुःख, अन्याय और विषमता को शब्दों…

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“दशहरा और गांधी जयंती: सत्य की दो दिशाएँ”

दशहरा — वह विजय पर्व,जो हमें याद दिलाता है कि कभी एक युग में सत्य ने असत्य पर विजय पाई थी,धर्म ने अधर्म को परास्त किया था,और मर्यादा पुरुषोत्तम राम के चरणों से रामराज्य की स्थापना हुई थी।जब श्रीराम ने रावण का वध किया,तो केवल एक राक्षस नहीं,बल्कि अहंकार, द्वेष, नफरत और छल का साम्राज्य…

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जीवन में दृष्टिकोण का महत्व

कहते हैं, चश्मे का रंग तय करता है कि दुनिया कैसी दिखेगी। वही आँखें, वही दृश्य, वही परिस्थितियाँ — पर दृष्टि का रंग बदलते ही संसार का अर्थ बदल जाता है। यही जीवन का रहस्य है — हम जिस दृष्टिकोण से संसार को देखते हैं, वही दृष्टिकोण हमारे सुख-दुःख, सुंदरता-कुरूपता और आशा-निराशा का निर्धारण करता…

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