महात्मा गांधी का चित्र

मोहनदास से महात्मा तक : गांधी के जीवन और विचारों की यात्रा

इतिहास में कभी-कभी कोई साधारण-सा दिखने वाला मनुष्य अपने असाधारण विचारों से अपने समय की सीमाएँ लाँघ जाता है। उसके हाथ में न तलवार होती है, न कोई विशाल सेना; फिर भी उसकी आवाज सत्ता की ऊँची दीवारों तक पहुँचती है और उसका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रश्न बन जाता है—क्या सत्य…

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रामधारी सिंह दिनकर

“कलम, आज उनकी जय बोल!” हिंदी साहित्य-जगत में कुछ रचनाकार ऐसे हुए हैं, जिन्होंने अपनी रचनाओं, विचारों और शब्दों की अमिट छाप से समय की सीमाओं को लाँघते हुए आने वाली पीढ़ियों के हृदय में अपना विशिष्ट स्थान बना लिया है।रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ऐसे ही युगद्रष्टा रचनाकार थे। उनके शब्दों में जहाँ स्वतंत्रता की आकांक्षा…

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मुंशी प्रेमचंद का चित्र

मुंशी प्रेमचंद : भारतीय जनजीवन के अमर इतिहासकार

“साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, उसका पथप्रदर्शक भी है।” यह उक्ति यदि किसी साहित्यकार के समूचे रचनात्मक व्यक्तित्व पर अक्षरशः चरितार्थ होती है, तो वे निस्संदेह मुंशी प्रेमचंद हैं। उन्होंने साहित्य को केवल मनोरंजन अथवा सौंदर्यबोध का साधन नहीं माना, बल्कि उसे समाज-परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया। जिस समय हिंदी साहित्य तिलिस्म, ऐयारी, कल्पनालोक…

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kabir ka chitra

कबीर : एक समग्र मूल्यांकन

भारतीय साहित्य के इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हैं जो किसी एक युग, सम्प्रदाय या विचारधारा की सीमाओं में नहीं बँधते। वे समय की धारा को पार कर प्रत्येक पीढ़ी से संवाद करते हैं और हर नए युग में नए अर्थों के साथ हमारे सामने उपस्थित होते हैं। कबीर ऐसे ही कालजयी कवि हैं। वे…

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सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का स्केच चित्र – छायावाद के महाप्राण कवि

निराला का काव्य और कथा साहित्य: एक समग्र अध्ययन

हिंदी साहित्य के इतिहास में छायावाद का युग स्वर्णिम अध्याय के रूप में प्रतिष्ठित है और उसके चार प्रमुख स्तंभों में से एक सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। वे केवल महाप्राण कवि ही नहीं, बल्कि समर्थ कथाकार, उपन्यासकार और निबंधकार भी थे। हिंदी कविता को परंपरागत बंधनों से मुक्त कर मुक्तछंद को…

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छायावाद के स्तंभ जयशंकर प्रसाद का चित्र

जयशंकर प्रसाद : छायावाद का विराट स्तम्भ

हिंदी साहित्य के इतिहास में कुछ व्यक्तित्व केवल रचनाकार नहीं होते, वे युग-चेतना के निर्माता होते हैं। छायावादी युग में यदि किसी एक साहित्यकार ने कविता, नाटक और कथा—तीनों विधाओं में समान रूप से गहन, स्थायी और निर्णायक छाप छोड़ी है, तो वह हैं जयशंकर प्रसाद। उनका साहित्य किसी एक भाव, किसी एक प्रवृत्ति या…

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रामवृक्ष बेनीपुरी

रामवृक्ष बेनीपुरी : कलम का जादूगर

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन केवल बंदूक और बारूद का इतिहास नहीं है; वह विचारों, शब्दों और चेतना का भी महायज्ञ रहा है। इस यज्ञ में जिन साहित्यकारों ने अपनी लेखनी से विचारों के महायज्ञ में आहुति दिए, उनमें रामवृक्ष बेनीपुरी का नाम अत्यंत आदर और गंभीरता से लिया जाता है। कलम के जादूगर के रूप में…

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रामधारी सिंह दिनकर का चित्र

रामधारी सिंह दिनकर का जीवन परिचय

हिंदी साहित्य में जब भी ओज, शौर्य और राष्ट्रीय चेतना की चर्चा होती है, तो सबसे पहले जिस नाम की स्मृति कौंधती है, वह है रामधारी सिंह ‘दिनकर’। वे ऐसे कवि थे जिन्होंने साहित्य को केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं रहने दिया, बल्कि उसे समाज और राष्ट्र की चेतना से जोड़ा। उनकी कविताओं में संघर्ष…

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Baba nagarjun image

✍️ बाबा नागार्जुन : जनकवि की कलम, जो व्यंग्य भी थी और वेदना भी

(जन्म विशेषांक – 30 जून 1911)लेखक – कुन्दन समदर्शी हर काल में कुछ कवि केवल शब्दों के साधक नहीं होते — वे समय के साहसी साक्षी होते हैं।बाबा नागार्जुन ऐसे ही जनकवि थे, जिनकी कविता ने साहित्य को सजाने के बजाय समाज को झकझोरने का कार्य किया।उनकी कविता में भूख की हूक है, क्रांति की…

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