दो जून की रोटी का संघर्ष का चित्र

सवाल दो जून के रोटी की

समय बदल गया, सरकारें बदल गईं, तकनीक बदल गई, जीवन की रफ्तार बदल गई। बैलगाड़ी से बुलेट ट्रेन तक और चिट्ठियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक का सफर तय हो गया। लेकिन करोड़ों लोगों के जीवन में एक सवाल ऐसा है जो आज भी अपनी जगह से नहीं हिला—दो जून की रोटी का सवाल।आजकल सोशल मीडिया…

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हरिवंश राय बच्चन का चित्र

हरिवंश राय बच्चन : अनुभूति का दर्शन

हिंदी साहित्य के आधुनिक युग में कुछ नाम ऐसे हैं, जिन्होंने कविता को अभिव्यक्ति नहीं, अनुभूति का दर्शन बना दिया। हरिवंश राय बच्चन उन्हीं विशिष्ट रचनाकारों में से एक हैं, जिन्होंने भावनाओं को ऐसा स्वर दिया कि वह पीढ़ियों की स्मृतियों में अमर हो गया। वे केवल एक कवि ही नहीं थे, बल्कि संवेदनाओं के…

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चुनाव पर व्यंग्य चित्र – राजनीति के प्रलोभन और जुगाड़ पर आधारित इलस्ट्रेशन

वादों की शहनाई

जैसे ही आचार संहिता की घोषणा होती है, नेता मौन साध लेते हैं—मानो तपस्या में लीन साधु हों। पर यह तपस्या सत्ता तक पहुँचने का ‘प्रवेश यज्ञ’ होती है। लेकिन जैसे ही चुनावी बिगुल बजता है, वही मौन माइक पकड़ लेता है और शोर का तीर्थ आरंभ हो जाता है। हर गली में मंच, हर…

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“दशहरा और गांधी जयंती: सत्य की दो दिशाएँ”

दशहरा — वह विजय पर्व,जो हमें याद दिलाता है कि कभी एक युग में सत्य ने असत्य पर विजय पाई थी,धर्म ने अधर्म को परास्त किया था,और मर्यादा पुरुषोत्तम राम के चरणों से रामराज्य की स्थापना हुई थी।जब श्रीराम ने रावण का वध किया,तो केवल एक राक्षस नहीं,बल्कि अहंकार, द्वेष, नफरत और छल का साम्राज्य…

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हिन्दी दिवस

हिंदी दिवस : राष्ट्र के आत्मा का स्वर

भारत की धड़कन उसकी भाषाओं में बसती है, और उनमें भी हिंदी वह धारा है जो उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम तक भारत को एक सूत्र में बाँधती है। यह भाषा केवल संप्रेषण का साधन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्रीय चेतना की जीवनरेखा है। संस्कृत की पवित्र धारा से बहती हुई हिंदी…

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