समदर्शी

शब्द मेरे साथी हैं, खामोशी मेरे गुरु

रामवृक्ष बेनीपुरी

रामवृक्ष बेनीपुरी : कलम का जादूगर

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन केवल बंदूक और बारूद का इतिहास नहीं है; वह विचारों, शब्दों और चेतना का भी महायज्ञ रहा है। इस यज्ञ में जिन साहित्यकारों ने अपनी लेखनी से विचारों के महायज्ञ में आहुति दिए, उनमें रामवृक्ष बेनीपुरी का नाम अत्यंत आदर और गंभीरता से लिया जाता है। कलम के जादूगर के रूप में…

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पहलवानी करते गोणु झा

गोनू झा की पहलवानी

मिथिला के राजदरबार में एक दिन हलचल मची हुई थी।दिल्ली का एक मशहूर पहलवान पूरे शहर में एलान करता घूम रहा था—“क्या मिथिला में कोई ऐसा बलवान नहीं, जो मेरे साथ अखाड़े में उतर सके?” उसकी छह फुट लंबी देह, साँवलापन, और उभरी हुई नसें ऐसी लगती थीं जैसे शरीर में लहरें दौड़ रही हों।…

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डिजिटल युग में लोग साथ होकर भी अकेले

डिजिटल युग का एकांत

मनुष्य मूलतः एक सामाजिक प्राणी है, यह कथन केवल जैविक सत्य नहीं बल्कि सभ्यता का दार्शनिक आधार है। मनुष्य अकेले नहीं जी सकता; वह संबंधों से बनता है, संवेदनाओं से सांस लेता है और संवादों से अस्तित्व पाता है। किंतु यह भी एक विडंबनापूर्ण सत्य है कि आधुनिक तकनीक के इस युग में, जहाँ मनुष्य…

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हरे रंग का सियार जंगल में राजा के रूप में खड़ा

रंगे सियार की सच्चाई

एक बार की बात है कि एक सियार जंगल में एक पुराने पेड़ के नीचे खड़ा था। तभी अचानक तेज़ हवा चली और पूरा पेड़ धराशायी हो गया। सियार उसकी चपेट में आ गया और बुरी तरह घायल हो गया। वह किसी तरह घिसटता-घिसटता अपनी मांद तक पहुँचा। कई दिनों तक वह दर्द से कराहता…

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मुल्ला नसीरुद्दीन की लोककथा का दृश्य

मुल्ला नसरुद्दीन और खुशबू की कीमत

एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन एक दुकान से अपने लिए दो नान और अपने गधे के लिए दस नान खरीद लाए। साथ ही भेड़ का भुना हुआ लजीज़ गोश्त भी लिया।वे दुकान से कुछ ही दूरी पर दरी बिछाकर बैठ गए और चैन से भोजन करने लगे। पास ही उनका गधा भी अपने हिस्से के नान…

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मुल्ला नसीरुद्दीन और जमाल अचकन पहने हुए – मजेदार कहानी का दृश्य

मुल्ला नसीरुद्दीन और अचकन का रहस्य

बहुत दिनों बाद मुल्ला नसीरुद्दीन से मिलने उनके पुराने दोस्त जमाल आए। जमाल को देखकर मुल्ला बेहद प्रसन्न हुए, आँखों में चमक आ गई और चेहरे पर मुस्कान फैल गई। “बहुत दिन हो गए दोस्त! चलो, बाहर घूम आते हैं,” मुल्ला ने उत्साह से कहा। जमाल ने अपनी ओर देखकर शर्माते हुए कहा,“नहीं मुल्ला, मेरे…

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अकबर बीरबल की बुद्धिमत्ता दर्शाता राजदरबार दृश्य

आधी धूप, आधी छाँह और आधी चादर का न्याय

आगरा का राजदरबार उस दिन भी वैसे ही भरा हुआ था, जैसा वह प्रतिदिन रहता था। संगमरमर की शीतल फर्श पर दूर-दूर तक दरबारियों की पंक्तियाँ सजी थीं और सिंहासन पर बादशाह अकबर गंभीर मुद्रा में बैठे हुए राजकार्य देख रहे थे। तभी द्वार पर हलचल हुई।एक थका-हारा किसान फटे वस्त्रों में दरबार के भीतर…

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मुल्ला नसीरुद्दीन की जादूगरी

मुल्ला नसीरुद्दीन की जादूगरी

— जब चोरी पकड़ी गई जादू के बहाने बात उन दिनों की है, जब मुल्ला नसीरुद्दीन बुख़ारा में रहते थे और उनकी बुद्धिमत्ता व विनोदपूर्ण हाज़िरजवाबी की चर्चा दूर-दूर तक फैली हुई थी। अमीर-रईस लोग उनकी संगति को अपने लिए सौभाग्य मानते थे। जिस घर में कोई दावत होती, वहीं मुल्ला नसीरुद्दीन को विशेष रूप…

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हरिवंश राय बच्चन का चित्र

हरिवंश राय बच्चन : अनुभूति का दर्शन

हिंदी साहित्य के आधुनिक युग में कुछ नाम ऐसे हैं, जिन्होंने कविता को अभिव्यक्ति नहीं, अनुभूति का दर्शन बना दिया। हरिवंश राय बच्चन उन्हीं विशिष्ट रचनाकारों में से एक हैं, जिन्होंने भावनाओं को ऐसा स्वर दिया कि वह पीढ़ियों की स्मृतियों में अमर हो गया। वे केवल एक कवि ही नहीं थे, बल्कि संवेदनाओं के…

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अतीत की छाया का चित्र

अतीत की छाया

कभी-कभी हम अपने वर्तमान से असंतुष्ट हो उठते हैं।हम शिकायत करते हैं कि जीवन वैसा क्यों नहीं जैसा हमने चाहा था।कभी भाग्य पर, कभी नियति पर, कभी किसी अदृश्य शक्ति पर दोष मढ़ते हैं।परंतु सच यह है कि हमारा आज न किसी ईश्वर की मनमर्ज़ी है, न किसी भाग्य की दुर्घटना —यह तो हमारे ही…

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