समदर्शी

शब्द मेरे साथी हैं, खामोशी मेरे गुरु

मुल्ला नसीरुद्दीन की जादूगरी

मुल्ला नसीरुद्दीन की जादूगरी

— जब चोरी पकड़ी गई जादू के बहाने बात उन दिनों की है, जब मुल्ला नसीरुद्दीन बुख़ारा में रहते थे और उनकी बुद्धिमत्ता व विनोदपूर्ण हाज़िरजवाबी की चर्चा दूर-दूर तक फैली हुई थी। अमीर-रईस लोग उनकी संगति को अपने लिए सौभाग्य मानते थे। जिस घर में कोई दावत होती, वहीं मुल्ला नसीरुद्दीन को विशेष रूप…

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हरिवंश राय बच्चन का चित्र

हरिवंश राय बच्चन : अनुभूति का दर्शन

हिंदी साहित्य के आधुनिक युग में कुछ नाम ऐसे हैं, जिन्होंने कविता को अभिव्यक्ति नहीं, अनुभूति का दर्शन बना दिया। हरिवंश राय बच्चन उन्हीं विशिष्ट रचनाकारों में से एक हैं, जिन्होंने भावनाओं को ऐसा स्वर दिया कि वह पीढ़ियों की स्मृतियों में अमर हो गया। वे केवल एक कवि ही नहीं थे, बल्कि संवेदनाओं के…

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अतीत की छाया का चित्र

अतीत की छाया

कभी-कभी हम अपने वर्तमान से असंतुष्ट हो उठते हैं।हम शिकायत करते हैं कि जीवन वैसा क्यों नहीं जैसा हमने चाहा था।कभी भाग्य पर, कभी नियति पर, कभी किसी अदृश्य शक्ति पर दोष मढ़ते हैं।परंतु सच यह है कि हमारा आज न किसी ईश्वर की मनमर्ज़ी है, न किसी भाग्य की दुर्घटना —यह तो हमारे ही…

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जीवन और संबंधों पर दार्शनिक विचार दर्शाता प्रतीकात्मक चित्र

जीवन और संबंध

मनुष्य का जीवन संबंधों के ताने-बाने में बुना हुआ एक विस्तृत गलीचा है—रंगों, ध्वनियों और स्मृतियों से भरा हुआ। यह गलीचा तभी अर्थपूर्ण हो उठता है जब इसके धागे प्रेम, भरोसे और सहजता से पिरोए गए हों। संबंधों का महत्व मनुष्य की मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक उन्नति में उतना ही अनिवार्य है जितना श्वास का…

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चेहरे जिंदगी के

चेहरे जिंदगी के – यह हिंदी कविता जीवन की दोहरी भावनाओं, हँसी और खामोशी, उजाले और अंधेरे के बीच झूलते अनुभवों को शब्द देती है। पढ़िए MyHindagi.com पर।

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चुनाव पर व्यंग्य चित्र – राजनीति के प्रलोभन और जुगाड़ पर आधारित इलस्ट्रेशन

वादों की शहनाई

जैसे ही आचार संहिता की घोषणा होती है, नेता मौन साध लेते हैं—मानो तपस्या में लीन साधु हों। पर यह तपस्या सत्ता तक पहुँचने का ‘प्रवेश यज्ञ’ होती है। लेकिन जैसे ही चुनावी बिगुल बजता है, वही मौन माइक पकड़ लेता है और शोर का तीर्थ आरंभ हो जाता है। हर गली में मंच, हर…

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दो बैलों की कथा

लेखक – मुंशी प्रेमचंद झुरी के पास दो बैल थे, जिनका नाम हीरा और मोती था। दोनों बैल बहुत ही हट्टे – कट्टे और आकर्षक थे, काम करने में भी वो बहुत ही फुर्तीले थे। काफी समय से साथ रहते रहते हीरा और मोती अच्छे दोस्त बन गए थे, वो एक ही नाद से चारा…

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काबुलीवाला

लेखक – रवीन्द्रनाथ टैगोर  मेरी पाँच बरस की छोटी लड़की मिनी क्षण-भर भी बात किए बिना नहीं रह सकती। जन्म लेने के बाद भाषा सीखने में उसने सिर्फ़ एक ही साल लगाया होगा। उसके बाद जब तक वह जगी किंतु मैं ऐसा नहीं कर पाता। मिनी का चुप रहना मुझे इतना अस्वाभाविक लगता है कि…

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यमलोक की तकनीकी भूल

एक बार, शायद दीपावली के कुछ ही दिन बाद की बात होगी।तारीख़ अब ठीक-ठीक याद नहीं,पर जो हुआ, वह यमलोक के इतिहास में दर्ज हो गया —“यमलोक की तकनीकी भूल” के नाम से। गोवर्धनपुर का एक आदमी था — गिरधारी।सीधा, ईमानदार, और इतना विनम्र कि उसकी भलमनसाहतगाँव वालों को असहज कर देती थी।वह कभी किसी…

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निराला का चित्र

महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – जीवन, रचनाएँ और साहित्यिक योगदान

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ आधुनिक हिंदी साहित्य के ऐसे महत्त्वपूर्ण कवि थे जिन्होंने कविता को छंदों की परंपरागत सीमाओं से मुक्त कर उसे जीवन के यथार्थ, सामाजिक संघर्ष और मानव-पीड़ा की अभिव्यक्ति बना दिया। उनमें जीवन के कठिन यथार्थ, सामाजिक संघर्षों और दलित-शोषित वर्ग की पीड़ा का सजीव चित्रण किया |उनकी कविताओं में ओज और करुणा,…

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