गोनू झा की पहलवानी

पहलवानी करते गोणु झा

मिथिला के राजदरबार में एक दिन हलचल मची हुई थी।
दिल्ली का एक मशहूर पहलवान पूरे शहर में एलान करता घूम रहा था—
“क्या मिथिला में कोई ऐसा बलवान नहीं, जो मेरे साथ अखाड़े में उतर सके?”

उसकी छह फुट लंबी देह, साँवलापन, और उभरी हुई नसें ऐसी लगती थीं जैसे शरीर में लहरें दौड़ रही हों। लोगों की भीड़ दूर से ही उसे देखकर सहम जा रही थी।राजा ने भी सुना, लेकिन दरबार में उपस्थित किसी पहलवान की हिम्मत नहीं हुई कि वह दिल्ली वाले के सामने खड़ा हो जाए।

तभी राजा की नजर गोनू झा पर पड़ी। गोनू झा हाथ जोड़कर धीरे से बोले,
“महाराज, हम पंडित लोग दिमाग से लड़ते हैं, देह से नहीं। कुश्ती का काम पहलवानों को ही दीजिए!”

राजा मुस्कुराए—“आज बुद्धि नहीं, मिथिला की इज्जत दाँव पर है।
और यह सम्मान आपसे बढ़कर कौन बचा सकता है?”

गोनू झा समझ गए कि आज बचने का कोई उपाय नहीं।
लोगों में यह खबर फैल गई कि दिल्ली के महाबली और गोनू झा की कुश्ती होने वाली है।

अखाड़ा सज गया।
दिल्ली वाला पहलवान गड़गड़ाहट भरी आवाज में बोला—
“पंडित जी, तैयार हो जाइए। आज आपको मैं मिट्टी में मिला दूँगा!”

गोनू झा शांत थे।उन्होंने हाथ उठाकर कहा—
“ठहरिए! हमारे मिथिला में एक परंपरा है। कुश्ती शुरू होने से पहले पहलवान की ताकत परखने के लिए उसकी नसें दबा कर देखी जाती हैं—कहीं वह बनावटी बलवान तो नहीं?”

दिल्ली वाला हँस पड़ा।
“अच्छा! तो पहले तुम मेरी नसें जाँच लो!”

यही तो गोनू चाहते थे।उन्होंने उसकी बाँह की उभरी नस पकड़ी… और पूरी ताकत से दबा दी।

पहलवान की चीख निकल गई—“आह! ये क्या कर रहे हो?”

गोनू झा शांत स्वर में बोले—
“अरे भैया, अभी तो पहली नस दबाई है। कुल चौबीस नसें दबानी पड़ती हैं।
अगर इतनी ही जल्दी दुखड़ा रोने लगे तो तीन घंटे की कुश्ती कैसे करोगे?”

लोग ठहाका लगाने लगे।
दिल्ली वाला शर्म से पसीने-पसीने हो गया।
वह समझ गया कि यह पंडित किसी आम आदमी का नाम नहीं—यह तो चतुराई का चलता–फिरता डिब्बा है।

वह बगलें झाँकता हुआ बोला—
“महाराज, मैं मिथिला की परंपरा को नहीं जानता था।
मैं मुकाबले से हटना चाहता हूँ!”

गोनू झा हाथों को मोड़कर पीछे हो गए।
भीड़ उनकी बुद्धिमत्ता पर दंग रह गई।
राजा ने गर्व से कहा—
“मिथिला का असली बल तो बुद्धि है, और आज गोनू झा ने यह फिर साबित कर दिया!”

गोनू झा हँसते हुए बोले—
“महाराज, बल से लड़ें तो कई गिरा दें,
पर बुद्धि से लड़ें तो…
बिना लड़े ही सबको गिरा दें!”

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