छायावाद के स्तंभ जयशंकर प्रसाद का चित्र

जयशंकर प्रसाद : छायावाद का विराट स्तम्भ

हिंदी साहित्य के इतिहास में कुछ व्यक्तित्व केवल रचनाकार नहीं होते, वे युग-चेतना के निर्माता होते हैं। छायावादी युग में यदि किसी एक साहित्यकार ने कविता, नाटक और कथा—तीनों विधाओं में समान रूप से गहन, स्थायी और निर्णायक छाप छोड़ी है, तो वह हैं जयशंकर प्रसाद। उनका साहित्य किसी एक भाव, किसी एक प्रवृत्ति या…

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रामवृक्ष बेनीपुरी

रामवृक्ष बेनीपुरी : कलम का जादूगर

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन केवल बंदूक और बारूद का इतिहास नहीं है; वह विचारों, शब्दों और चेतना का भी महायज्ञ रहा है। इस यज्ञ में जिन साहित्यकारों ने अपनी लेखनी से विचारों के महायज्ञ में आहुति दिए, उनमें रामवृक्ष बेनीपुरी का नाम अत्यंत आदर और गंभीरता से लिया जाता है। कलम के जादूगर के रूप में…

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निराला का चित्र

महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – जीवन, रचनाएँ और साहित्यिक योगदान

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ आधुनिक हिंदी साहित्य के ऐसे महत्त्वपूर्ण कवि थे जिन्होंने कविता को छंदों की परंपरागत सीमाओं से मुक्त कर उसे जीवन के यथार्थ, सामाजिक संघर्ष और मानव-पीड़ा की अभिव्यक्ति बना दिया। उनमें जीवन के कठिन यथार्थ, सामाजिक संघर्षों और दलित-शोषित वर्ग की पीड़ा का सजीव चित्रण किया |उनकी कविताओं में ओज और करुणा,…

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