एक सहयात्री

“कई वर्ष बीत जाते हैं, पर कुछ यात्राएँ समय की धूल में नहीं दबतीं। वे स्मृति के किसी कोमल कोने में सुरक्षित रहती हैं और जीवन के किसी अनपेक्षित क्षण में अचानक सामने आ खड़ी होती हैं। आज ऐसा ही एक क्षण आया—और उसके साथ लौट आई पटना से कटिहार तक की वह रेलयात्रा, जिसमें…

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