छायावाद के स्तंभ जयशंकर प्रसाद का चित्र

जयशंकर प्रसाद : छायावाद का विराट स्तम्भ

हिंदी साहित्य के इतिहास में कुछ व्यक्तित्व केवल रचनाकार नहीं होते, वे युग-चेतना के निर्माता होते हैं। छायावादी युग में यदि किसी एक साहित्यकार ने कविता, नाटक और कथा—तीनों विधाओं में समान रूप से गहन, स्थायी और निर्णायक छाप छोड़ी है, तो वह हैं जयशंकर प्रसाद। उनका साहित्य किसी एक भाव, किसी एक प्रवृत्ति या…

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