✨ मौन की मशाल
भूमिका:हर युग की क्रांति में शोर नहीं होता — कभी एक मौन ही होता है जो समय को जगा देता है। यह कविता उन खामोश आंदोलनों, लेखनी की ताकत, और आंतरिक ज्वालाओं को समर्पित है, जो बिना नारे, बिना बगावत के प्रतीक बन जाती हैं। हर काम शोर मचाकर नहीं होता,कुछ काम ख़ामोशी कर जाती…