डिजिटल युग का एकांत
मनुष्य मूलतः एक सामाजिक प्राणी है, यह कथन केवल जैविक सत्य नहीं बल्कि सभ्यता का दार्शनिक आधार है। मनुष्य अकेले नहीं जी सकता; वह संबंधों से बनता है, संवेदनाओं से सांस लेता है और संवादों से अस्तित्व पाता है। किंतु यह भी एक विडंबनापूर्ण सत्य है कि आधुनिक तकनीक के इस युग में, जहाँ मनुष्य…