हंसों के साथ उड़ता कछुआ।

कछुआ और हंस

(नीति-कथा : वाणी पर संयम) एक तालाब में एक कछुआ रहता था। उसी तालाब में दो हंस प्रायः तैरने आया करते थे। हंस अत्यंत हंसमुख, मिलनसार और ज्ञानी थे। दूर-दूर तक घूमने के कारण वे अनेक स्थानों की अद्भुत बातें जानते थे। कछुए और हंसों की मित्रता शीघ्र ही गहरी हो गई। कछुए को हंसों…

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पहलवानी करते गोणु झा

गोनू झा की पहलवानी

मिथिला के राजदरबार में एक दिन हलचल मची हुई थी।दिल्ली का एक मशहूर पहलवान पूरे शहर में एलान करता घूम रहा था—“क्या मिथिला में कोई ऐसा बलवान नहीं, जो मेरे साथ अखाड़े में उतर सके?” उसकी छह फुट लंबी देह, साँवलापन, और उभरी हुई नसें ऐसी लगती थीं जैसे शरीर में लहरें दौड़ रही हों।…

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हरे रंग का सियार जंगल में राजा के रूप में खड़ा

रंगे सियार की सच्चाई

एक बार की बात है कि एक सियार जंगल में एक पुराने पेड़ के नीचे खड़ा था। तभी अचानक तेज़ हवा चली और पूरा पेड़ धराशायी हो गया। सियार उसकी चपेट में आ गया और बुरी तरह घायल हो गया। वह किसी तरह घिसटता-घिसटता अपनी मांद तक पहुँचा। कई दिनों तक वह दर्द से कराहता…

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मुल्ला नसीरुद्दीन की लोककथा का दृश्य

मुल्ला नसरुद्दीन और खुशबू की कीमत

एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन एक दुकान से अपने लिए दो नान और अपने गधे के लिए दस नान खरीद लाए। साथ ही भेड़ का भुना हुआ लजीज़ गोश्त भी लिया।वे दुकान से कुछ ही दूरी पर दरी बिछाकर बैठ गए और चैन से भोजन करने लगे। पास ही उनका गधा भी अपने हिस्से के नान…

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मुल्ला नसीरुद्दीन और जमाल अचकन पहने हुए – मजेदार कहानी का दृश्य

मुल्ला नसीरुद्दीन और अचकन का रहस्य

बहुत दिनों बाद मुल्ला नसीरुद्दीन से मिलने उनके पुराने दोस्त जमाल आए। जमाल को देखकर मुल्ला बेहद प्रसन्न हुए, आँखों में चमक आ गई और चेहरे पर मुस्कान फैल गई। “बहुत दिन हो गए दोस्त! चलो, बाहर घूम आते हैं,” मुल्ला ने उत्साह से कहा। जमाल ने अपनी ओर देखकर शर्माते हुए कहा,“नहीं मुल्ला, मेरे…

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अकबर बीरबल की बुद्धिमत्ता दर्शाता राजदरबार दृश्य

आधी धूप, आधी छाँह और आधी चादर का न्याय

आगरा का राजदरबार उस दिन भी वैसे ही भरा हुआ था, जैसा वह प्रतिदिन रहता था। संगमरमर की शीतल फर्श पर दूर-दूर तक दरबारियों की पंक्तियाँ सजी थीं और सिंहासन पर बादशाह अकबर गंभीर मुद्रा में बैठे हुए राजकार्य देख रहे थे। तभी द्वार पर हलचल हुई।एक थका-हारा किसान फटे वस्त्रों में दरबार के भीतर…

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मुल्ला नसीरुद्दीन की जादूगरी

मुल्ला नसीरुद्दीन की जादूगरी

— जब चोरी पकड़ी गई जादू के बहाने बात उन दिनों की है, जब मुल्ला नसीरुद्दीन बुख़ारा में रहते थे और उनकी बुद्धिमत्ता व विनोदपूर्ण हाज़िरजवाबी की चर्चा दूर-दूर तक फैली हुई थी। अमीर-रईस लोग उनकी संगति को अपने लिए सौभाग्य मानते थे। जिस घर में कोई दावत होती, वहीं मुल्ला नसीरुद्दीन को विशेष रूप…

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दो बैलों की कथा

लेखक – मुंशी प्रेमचंद झुरी के पास दो बैल थे, जिनका नाम हीरा और मोती था। दोनों बैल बहुत ही हट्टे – कट्टे और आकर्षक थे, काम करने में भी वो बहुत ही फुर्तीले थे। काफी समय से साथ रहते रहते हीरा और मोती अच्छे दोस्त बन गए थे, वो एक ही नाद से चारा…

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काबुलीवाला

लेखक – रवीन्द्रनाथ टैगोर  मेरी पाँच बरस की छोटी लड़की मिनी क्षण-भर भी बात किए बिना नहीं रह सकती। जन्म लेने के बाद भाषा सीखने में उसने सिर्फ़ एक ही साल लगाया होगा। उसके बाद जब तक वह जगी किंतु मैं ऐसा नहीं कर पाता। मिनी का चुप रहना मुझे इतना अस्वाभाविक लगता है कि…

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पूस की रात

प्रेमचंद हल्कू ने आकर स्त्री से कहा—सहना आया है, लाओ, जो रुपए रखे हैं, उसे दे दूँ, किसी तरह गला तो छूटे। मुन्नी झाड़ू लगा रही थी। पीछे फिरकर बोली—तीन ही तो रुपए हैं, दे दोगे तो कम्मल कहाँ से आवेगा? माघ-पूस की रात हार में कैसे कटेगी? उससे कह दो, फसल पर दे देंगे।…

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