कछुआ और हंस
(नीति-कथा : वाणी पर संयम) एक तालाब में एक कछुआ रहता था। उसी तालाब में दो हंस प्रायः तैरने आया करते थे। हंस अत्यंत हंसमुख, मिलनसार और ज्ञानी थे। दूर-दूर तक घूमने के कारण वे अनेक स्थानों की अद्भुत बातें जानते थे। कछुए और हंसों की मित्रता शीघ्र ही गहरी हो गई। कछुए को हंसों…
नव वर्ष : बसंत की आहट
आओ,नए वर्ष कोहथेली पर रखी धूप की तरहसहेज लें—जिसमें बीते कल की ठंडक भी होऔर आने वाले स्वप्नों की ऊष्मा भी।कुछ पत्तेझरे हैं स्मृतियों के;कुछ शाखाएँ अभी भीप्रतीक्षा में काँप रही हैं।पर देखो—कहीं भीतरकिसी कोपल नेफिर से हिम्मत की हैजन्म लेने की।नव वर्षकोई तिथि नहीं;यह तोजीवन की देह मेंफिर सेविश्वास कारक्त-संचार है।हवा मेंबसंत की पहली…
मैथिलीशरण गुप्त : शब्दों में बसती सभ्यता
यदि किसी कवि को पढ़ते हुए ऐसी अनुभूति हो कि आप केवल शब्द नहीं पढ़ रहे, बल्कि शब्दों में निहित भावों के माध्यम से पूरी सभ्यता आपसे संवाद कर रही है — तो समझिए आप मैथिलीशरण गुप्त के संसार में प्रवेश कर चुके हैं।उनके यहाँ कविता भाषा नहीं रह जाती, संस्कार बन जाती है; पंक्तियाँ…
रामवृक्ष बेनीपुरी : कलम का जादूगर
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन केवल बंदूक और बारूद का इतिहास नहीं है; वह विचारों, शब्दों और चेतना का भी महायज्ञ रहा है। इस यज्ञ में जिन साहित्यकारों ने अपनी लेखनी से विचारों के महायज्ञ में आहुति दिए, उनमें रामवृक्ष बेनीपुरी का नाम अत्यंत आदर और गंभीरता से लिया जाता है। कलम के जादूगर के रूप में…
गोनू झा की पहलवानी
मिथिला के राजदरबार में एक दिन हलचल मची हुई थी।दिल्ली का एक मशहूर पहलवान पूरे शहर में एलान करता घूम रहा था—“क्या मिथिला में कोई ऐसा बलवान नहीं, जो मेरे साथ अखाड़े में उतर सके?” उसकी छह फुट लंबी देह, साँवलापन, और उभरी हुई नसें ऐसी लगती थीं जैसे शरीर में लहरें दौड़ रही हों।…
डिजिटल युग का एकांत
मनुष्य मूलतः एक सामाजिक प्राणी है, यह कथन केवल जैविक सत्य नहीं बल्कि सभ्यता का दार्शनिक आधार है। मनुष्य अकेले नहीं जी सकता; वह संबंधों से बनता है, संवेदनाओं से सांस लेता है और संवादों से अस्तित्व पाता है। किंतु यह भी एक विडंबनापूर्ण सत्य है कि आधुनिक तकनीक के इस युग में, जहाँ मनुष्य…
रंगे सियार की सच्चाई
एक बार की बात है कि एक सियार जंगल में एक पुराने पेड़ के नीचे खड़ा था। तभी अचानक तेज़ हवा चली और पूरा पेड़ धराशायी हो गया। सियार उसकी चपेट में आ गया और बुरी तरह घायल हो गया। वह किसी तरह घिसटता-घिसटता अपनी मांद तक पहुँचा। कई दिनों तक वह दर्द से कराहता…
मुल्ला नसरुद्दीन और खुशबू की कीमत
एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन एक दुकान से अपने लिए दो नान और अपने गधे के लिए दस नान खरीद लाए। साथ ही भेड़ का भुना हुआ लजीज़ गोश्त भी लिया।वे दुकान से कुछ ही दूरी पर दरी बिछाकर बैठ गए और चैन से भोजन करने लगे। पास ही उनका गधा भी अपने हिस्से के नान…
मुल्ला नसीरुद्दीन और अचकन का रहस्य
बहुत दिनों बाद मुल्ला नसीरुद्दीन से मिलने उनके पुराने दोस्त जमाल आए। जमाल को देखकर मुल्ला बेहद प्रसन्न हुए, आँखों में चमक आ गई और चेहरे पर मुस्कान फैल गई। “बहुत दिन हो गए दोस्त! चलो, बाहर घूम आते हैं,” मुल्ला ने उत्साह से कहा। जमाल ने अपनी ओर देखकर शर्माते हुए कहा,“नहीं मुल्ला, मेरे…
आधी धूप, आधी छाँह और आधी चादर का न्याय
आगरा का राजदरबार उस दिन भी वैसे ही भरा हुआ था, जैसा वह प्रतिदिन रहता था। संगमरमर की शीतल फर्श पर दूर-दूर तक दरबारियों की पंक्तियाँ सजी थीं और सिंहासन पर बादशाह अकबर गंभीर मुद्रा में बैठे हुए राजकार्य देख रहे थे। तभी द्वार पर हलचल हुई।एक थका-हारा किसान फटे वस्त्रों में दरबार के भीतर…