Generated by All in One SEO v5.0.1.1, this is an llms.txt file, used by LLMs to index the site. # MyHindagi.com शब्द मेरे साथी हैं, खामोशी मेरे गुरु ## Sitemaps - [XML Sitemap](https://myhindagi.com/sitemap.xml): Contains all public & indexable URLs for this website. ## Posts - [रामधारी सिंह दिनकर](https://myhindagi.com/ramdhari-singh-dinkar/) - “कलम, आज उनकी जय बोल!” हिंदी साहित्य-जगत में कुछ रचनाकार ऐसे हुए हैं, जिन्होंने अपनी रचनाओं, विचारों और शब्दों की अमिट छाप से समय की सीमाओं को लाँघते हुए आने वाली पीढ़ियों के हृदय में अपना विशिष्ट स्थान बना लिया है।रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ऐसे ही युगद्रष्टा रचनाकार थे। उनके शब्दों में जहाँ स्वतंत्रता की आकांक्षा - [रामधारी सिंह दिनकर का जीवन परिचय](https://myhindagi.com/ramdhari-singh-dinkar-ek-sahityik-parichay/) - हिंदी साहित्य में जब भी ओज, शौर्य और राष्ट्रीय चेतना की चर्चा होती है, तो सबसे पहले जिस नाम की स्मृति कौंधती है, वह है रामधारी सिंह 'दिनकर'। वे ऐसे कवि थे जिन्होंने साहित्य को केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं रहने दिया, बल्कि उसे समाज और राष्ट्र की चेतना से जोड़ा। उनकी कविताओं में संघर्ष - [हिंदी : एक भाषा, एक सांस्कृतिक यात्रा](https://myhindagi.com/hindi-ek-bhasha-ek-sanskritik-yatra/) - हिंदी दिवस के संदर्भ में हमारी भाषा-परंपरा, विकास और राष्ट्रीय पहचान की कहानी—यह अवसर भाषा की समृद्धि को सामने लाता है। - [हिंदी : भारत की पहचान](https://myhindagi.com/hindi-bharat-kee-pahchan/) - Explore हिंदी दिवस and how language binds a nation, shaping India’s identity from the heart of the culture. हिंदी दिवस reflects unity in diversity of India. - [मुंशी प्रेमचंद : भारतीय जनजीवन के अमर इतिहासकार](https://myhindagi.com/munshi-premchand/) - "साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, उसका पथप्रदर्शक भी है।" यह उक्ति यदि किसी साहित्यकार के समूचे रचनात्मक व्यक्तित्व पर अक्षरशः चरितार्थ होती है, तो वे निस्संदेह मुंशी प्रेमचंद हैं। उन्होंने साहित्य को केवल मनोरंजन अथवा सौंदर्यबोध का साधन नहीं माना, बल्कि उसे समाज-परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया। जिस समय हिंदी साहित्य तिलिस्म, ऐयारी, कल्पनालोक - [कबीर : एक समग्र मूल्यांकन](https://myhindagi.com/kabir-samagra-mulyankan/) - भारतीय साहित्य के इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हैं जो किसी एक युग, सम्प्रदाय या विचारधारा की सीमाओं में नहीं बँधते। वे समय की धारा को पार कर प्रत्येक पीढ़ी से संवाद करते हैं और हर नए युग में नए अर्थों के साथ हमारे सामने उपस्थित होते हैं। कबीर ऐसे ही कालजयी कवि हैं। वे - [सवाल दो जून के रोटी की](https://myhindagi.com/sawal-do-jun-ki-roti-ka/) - समय बदल गया, सरकारें बदल गईं, तकनीक बदल गई, जीवन की रफ्तार बदल गई। बैलगाड़ी से बुलेट ट्रेन तक और चिट्ठियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक का सफर तय हो गया। लेकिन करोड़ों लोगों के जीवन में एक सवाल ऐसा है जो आज भी अपनी जगह से नहीं हिला—दो जून की रोटी का सवाल।आजकल सोशल मीडिया - [निराला का काव्य और कथा साहित्य: एक समग्र अध्ययन](https://myhindagi.com/nirala-ka-kavya-aur-katha-sahitya/) - हिंदी साहित्य के इतिहास में छायावाद का युग स्वर्णिम अध्याय के रूप में प्रतिष्ठित है और उसके चार प्रमुख स्तंभों में से एक सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। वे केवल महाप्राण कवि ही नहीं, बल्कि समर्थ कथाकार, उपन्यासकार और निबंधकार भी थे। हिंदी कविता को परंपरागत बंधनों से मुक्त कर मुक्तछंद को - [वादों की शहनाई](https://myhindagi.com/wadon-kee-shahnai/) - जैसे ही आचार संहिता की घोषणा होती है, नेता मौन साध लेते हैं—मानो तपस्या में लीन साधु हों। पर यह तपस्या सत्ता तक पहुँचने का ‘प्रवेश यज्ञ’ होती है। लेकिन जैसे ही चुनावी बिगुल बजता है, वही मौन माइक पकड़ लेता है और शोर का तीर्थ आरंभ हो जाता है। हर गली में मंच, हर - [एक सहयात्री](https://myhindagi.com/ek-sahyatri/) - “कई वर्ष बीत जाते हैं, पर कुछ यात्राएँ समय की धूल में नहीं दबतीं। वे स्मृति के किसी कोमल कोने में सुरक्षित रहती हैं और जीवन के किसी अनपेक्षित क्षण में अचानक सामने आ खड़ी होती हैं। आज ऐसा ही एक क्षण आया—और उसके साथ लौट आई पटना से कटिहार तक की वह रेलयात्रा, जिसमें - [रंगे सियार की सच्चाई](https://myhindagi.com/range-siyar-ki-sachai/) - रंगे सियार की कहानी एक प्रेरणादायक नैतिक कथा है जो सिखाती है कि नकली पहचान और धोखे का अंत हमेशा बुरा होता है। - [डिजिटल युग का एकांत](https://myhindagi.com/digital-yug-ka-ekant/) - मनुष्य मूलतः एक सामाजिक प्राणी है, यह कथन केवल जैविक सत्य नहीं बल्कि सभ्यता का दार्शनिक आधार है। मनुष्य अकेले नहीं जी सकता; वह संबंधों से बनता है, संवेदनाओं से सांस लेता है और संवादों से अस्तित्व पाता है। किंतु यह भी एक विडंबनापूर्ण सत्य है कि आधुनिक तकनीक के इस युग में, जहाँ मनुष्य - [जीवन : एक अनवरत यात्रा](https://myhindagi.com/eevan-ek-anavarat-yatra/) - जीवन एक अनवरत यात्रा है जहाँ लोग आते-जाते रहते हैं। यह निबंध समय, रिश्तों की अनित्यता और साथ की संवेदना पर गहन विचार प्रस्तुत करता है। - [परछाइयों के बीच भागती ज़िन्दगी](https://myhindagi.com/parchaiyon-ke-beech-bhagti-zindagi/) - आज की तेज़ रफ्तार ज़िन्दगी, स्मृतियाँ, थकान और नश्वर सौंदर्य पर आधारित एक संवेदनशील हिंदी कविता। - [जयशंकर प्रसाद : छायावाद का विराट स्तम्भ](https://myhindagi.com/jaishankar-prasad-vyaktitva-krititva/) - हिंदी साहित्य के इतिहास में कुछ व्यक्तित्व केवल रचनाकार नहीं होते, वे युग-चेतना के निर्माता होते हैं। छायावादी युग में यदि किसी एक साहित्यकार ने कविता, नाटक और कथा—तीनों विधाओं में समान रूप से गहन, स्थायी और निर्णायक छाप छोड़ी है, तो वह हैं जयशंकर प्रसाद। उनका साहित्य किसी एक भाव, किसी एक प्रवृत्ति या - [कछुआ और हंस](https://myhindagi.com/kachhua-aur-hans/) - (नीति-कथा : वाणी पर संयम) एक तालाब में एक कछुआ रहता था। उसी तालाब में दो हंस प्रायः तैरने आया करते थे। हंस अत्यंत हंसमुख, मिलनसार और ज्ञानी थे। दूर-दूर तक घूमने के कारण वे अनेक स्थानों की अद्भुत बातें जानते थे। कछुए और हंसों की मित्रता शीघ्र ही गहरी हो गई। कछुए को हंसों - [गोनू झा की पहलवानी](https://myhindagi.com/gonu-jha-ke-kisse/) - #मिथिला के राजदरबार में बुद्धि की जीत हुई! गोनू झा की चतुराई से दिल्ली के पहलवान को हराकर मिथिला की परंपरा की महानता साबित की। - [नव वर्ष : बसंत की आहट](https://myhindagi.com/nav-varsh-basant-ki-aahat/) - नव वर्ष पर एक संवेदनशील और दार्शनिक हिंदी कविता, जहाँ बसंत आशा का प्रतीक है और जीवन आगे बढ़ते रहने की मानवीय भाषा बन जाता है। - [ज़िंदगी की सलवटें](https://myhindagi.com/jindagi/) - 'ज़िंदगी की सलवटें’ एक विचारशील हिंदी कविता है, जो संघर्ष, समय, मौन और आत्मिक ज़ख़्मों को गहरे काव्यात्मक बिंबों में व्यक्त करती है। - [जिंदगी के इम्तिहान](https://myhindagi.com/jindagi-ke-imtihan/) - एक सुनहरी सुबह की कोई शाम लिख दूँ,ठोकर खाकर जो गिरा, वो अंजाम लिख दूँ।जज़्बातों के भँवर में ऐसे उलझा हूँ, यारो,चलो ज़िंदगी के सारे इम्तिहान लिख दूँ। जो सीखा है हमने अपनी तन्हाइयों में,उस हर सफ़े पर अपना पैग़ाम लिख दूँ।कभी सन्नाटों ने दिया हौसला मुझको,कभी आंधियों में खुद ही सँभाला खुद को। अब - [हिंदी दिवस : राष्ट्र के आत्मा का स्वर](https://myhindagi.com/hindi-diwas/) - भारत की धड़कन उसकी भाषाओं में बसती है, और उनमें भी हिंदी वह धारा है जो उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम तक भारत को एक सूत्र में बाँधती है। यह भाषा केवल संप्रेषण का साधन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्रीय चेतना की जीवनरेखा है। संस्कृत की पवित्र धारा से बहती हुई हिंदी - [जीवन में दृष्टिकोण का महत्व](https://myhindagi.com/jeevan-me-drishtikon-ka-mahatva/) - कहते हैं, चश्मे का रंग तय करता है कि दुनिया कैसी दिखेगी। वही आँखें, वही दृश्य, वही परिस्थितियाँ — पर दृष्टि का रंग बदलते ही संसार का अर्थ बदल जाता है। यही जीवन का रहस्य है — हम जिस दृष्टिकोण से संसार को देखते हैं, वही दृष्टिकोण हमारे सुख-दुःख, सुंदरता-कुरूपता और आशा-निराशा का निर्धारण करता - [“दशहरा और गांधी जयंती: सत्य की दो दिशाएँ”](https://myhindagi.com/dussehra-gandhi-jayanti/) - दशहरा — वह विजय पर्व,जो हमें याद दिलाता है कि कभी एक युग में सत्य ने असत्य पर विजय पाई थी,धर्म ने अधर्म को परास्त किया था,और मर्यादा पुरुषोत्तम राम के चरणों से रामराज्य की स्थापना हुई थी।जब श्रीराम ने रावण का वध किया,तो केवल एक राक्षस नहीं,बल्कि अहंकार, द्वेष, नफरत और छल का साम्राज्य - ["प्रेमचंद: हिंदी कथा-साहित्य के युगपुरुष"](https://myhindagi.com/premchand-hindi-katha-ke-yugpurus/) - जब-जब हिंदी साहित्य की चर्चा होती है, तब-तब प्रेमचंद का नाम श्रद्धा, सम्मान और आदर के साथ लिया जाता है।उनका काल हिंदी कथा-साहित्य का स्वर्णयुग माना जाता है।वे केवल एक कथाकार या उपन्यासकार ही नहीं, बल्कि यथार्थ के महामार्ग पर चलने वाले एक महामानव थे, जिन्होंने समाज में व्याप्त दुःख, अन्याय और विषमता को शब्दों - [महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – जीवन, रचनाएँ और साहित्यिक योगदान](https://myhindagi.com/suryakant-tripathi-nirala-jeevan-sahitya/) - #सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ आधुनिक हिंदी साहित्य के ऐसे महत्त्वपूर्ण कवि थे जिन्होंने कविता को छंदों की परंपरागत सीमाओं से मुक्त कर उसे जीवन के यथार्थ, सामाजिक संघर्ष और मानव-पीड़ा की अभिव्यक्ति बना दिया। उनमें जीवन के कठिन यथार्थ, सामाजिक संघर्षों और दलित-शोषित वर्ग की पीड़ा का सजीव चित्रण किया |उनकी कविताओं में ओज और करुणा, - [यमलोक की तकनीकी भूल](https://myhindagi.com/yamlok-kee-takniki-bhul/) - एक बार, शायद दीपावली के कुछ ही दिन बाद की बात होगी।तारीख़ अब ठीक-ठीक याद नहीं,पर जो हुआ, वह यमलोक के इतिहास में दर्ज हो गया —“यमलोक की तकनीकी भूल” के नाम से। गोवर्धनपुर का एक आदमी था — गिरधारी।सीधा, ईमानदार, और इतना विनम्र कि उसकी भलमनसाहतगाँव वालों को असहज कर देती थी।वह कभी किसी यह कहानी यमलोक की फ़ाइल प्रणाली के माध्यम से आधुनिक नौकरशाही और मानव-व्यवस्था पर गहरा व्यंग्य करती है। एक ऐसी रूपक कथा जहाँ नियम और आत्मा दोनों समीक्षा में फँसे हैं। - [काबुलीवाला](https://myhindagi.com/काबुलीवाला/) - लेखक - रवीन्द्रनाथ टैगोर मेरी पाँच बरस की छोटी लड़की मिनी क्षण-भर भी बात किए बिना नहीं रह सकती। जन्म लेने के बाद भाषा सीखने में उसने सिर्फ़ एक ही साल लगाया होगा। उसके बाद जब तक वह जगी किंतु मैं ऐसा नहीं कर पाता। मिनी का चुप रहना मुझे इतना अस्वाभाविक लगता है कि - [हरिवंश राय बच्चन : अनुभूति का दर्शन](https://myhindagi.com/harivansh-rai-bchchan-jivani-kavita-madhushala/) - हिंदी साहित्य के आधुनिक युग में कुछ नाम ऐसे हैं, जिन्होंने कविता को अभिव्यक्ति नहीं, अनुभूति का दर्शन बना दिया। हरिवंश राय बच्चन उन्हीं विशिष्ट रचनाकारों में से एक हैं, जिन्होंने भावनाओं को ऐसा स्वर दिया कि वह पीढ़ियों की स्मृतियों में अमर हो गया। वे केवल एक कवि ही नहीं थे, बल्कि संवेदनाओं के - [मुल्ला नसीरुद्दीन की जादूगरी](https://myhindagi.com/mulla-nasiruddin-ki-jadugari/) - — जब चोरी पकड़ी गई जादू के बहाने बात उन दिनों की है, जब मुल्ला नसीरुद्दीन बुख़ारा में रहते थे और उनकी बुद्धिमत्ता व विनोदपूर्ण हाज़िरजवाबी की चर्चा दूर-दूर तक फैली हुई थी। अमीर-रईस लोग उनकी संगति को अपने लिए सौभाग्य मानते थे। जिस घर में कोई दावत होती, वहीं मुल्ला नसीरुद्दीन को विशेष रूप - [आधी धूप, आधी छाँह और आधी चादर का न्याय](https://myhindagi.com/aadhi-chaadar-ka-nyay-akbar-birbal/) - आगरा का राजदरबार उस दिन भी वैसे ही भरा हुआ था, जैसा वह प्रतिदिन रहता था। संगमरमर की शीतल फर्श पर दूर-दूर तक दरबारियों की पंक्तियाँ सजी थीं और सिंहासन पर बादशाह अकबर गंभीर मुद्रा में बैठे हुए राजकार्य देख रहे थे। तभी द्वार पर हलचल हुई।एक थका-हारा किसान फटे वस्त्रों में दरबार के भीतर - [मुल्ला नसरुद्दीन और खुशबू की कीमत](https://myhindagi.com/mulla-nasiruddin-khushboo-ki-keemat/) - एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन एक दुकान से अपने लिए दो नान और अपने गधे के लिए दस नान खरीद लाए। साथ ही भेड़ का भुना हुआ लजीज़ गोश्त भी लिया।वे दुकान से कुछ ही दूरी पर दरी बिछाकर बैठ गए और चैन से भोजन करने लगे। पास ही उनका गधा भी अपने हिस्से के नान - [रामवृक्ष बेनीपुरी : कलम का जादूगर](https://myhindagi.com/ramvriksh-benipuri-hindi-sahitya/) - रामवृक्ष बेनीपुरी का साहित्य भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, समाजवादी दृष्टि और मनुष्य-केंद्रित वैचारिक विवेक का सशक्त दस्तावेज है। नैतिक लेखन उनकी विशेषता है। - [मैथिलीशरण गुप्त : शब्दों में बसती सभ्यता](https://myhindagi.com/maithilisharan-gupt-ka-sahitya/) - यदि किसी कवि को पढ़ते हुए ऐसी अनुभूति हो कि आप केवल शब्द नहीं पढ़ रहे, बल्कि शब्दों में निहित भावों के माध्यम से पूरी सभ्यता आपसे संवाद कर रही है — तो समझिए आप मैथिलीशरण गुप्त के संसार में प्रवेश कर चुके हैं।उनके यहाँ कविता भाषा नहीं रह जाती, संस्कार बन जाती है; पंक्तियाँ - [जीवन और संबंध](https://myhindagi.com/jeevan-aur-sambandh/) - मनुष्य का जीवन संबंधों के ताने-बाने में बुना हुआ एक विस्तृत गलीचा है—रंगों, ध्वनियों और स्मृतियों से भरा हुआ। यह गलीचा तभी अर्थपूर्ण हो उठता है जब इसके धागे प्रेम, भरोसे और सहजता से पिरोए गए हों। संबंधों का महत्व मनुष्य की मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक उन्नति में उतना ही अनिवार्य है जितना श्वास का - [मुल्ला नसीरुद्दीन और अचकन का रहस्य](https://myhindagi.com/mulla-nasiruddin-achkan-ka-raaz/) - बहुत दिनों बाद मुल्ला नसीरुद्दीन से मिलने उनके पुराने दोस्त जमाल आए। जमाल को देखकर मुल्ला बेहद प्रसन्न हुए, आँखों में चमक आ गई और चेहरे पर मुस्कान फैल गई। "बहुत दिन हो गए दोस्त! चलो, बाहर घूम आते हैं," मुल्ला ने उत्साह से कहा। जमाल ने अपनी ओर देखकर शर्माते हुए कहा,"नहीं मुल्ला, मेरे - [अतीत की छाया](https://myhindagi.com/ateet-kee-chhaya/) - कभी-कभी हम अपने वर्तमान से असंतुष्ट हो उठते हैं।हम शिकायत करते हैं कि जीवन वैसा क्यों नहीं जैसा हमने चाहा था।कभी भाग्य पर, कभी नियति पर, कभी किसी अदृश्य शक्ति पर दोष मढ़ते हैं।परंतु सच यह है कि हमारा आज न किसी ईश्वर की मनमर्ज़ी है, न किसी भाग्य की दुर्घटना —यह तो हमारे ही - [चेहरे जिंदगी के](https://myhindagi.com/https-myhindagi-com-chehre-jindagi-ke/) - चेहरे जिंदगी के – यह हिंदी कविता जीवन की दोहरी भावनाओं, हँसी और खामोशी, उजाले और अंधेरे के बीच झूलते अनुभवों को शब्द देती है। पढ़िए MyHindagi.com पर। - [दो बैलों की कथा](https://myhindagi.com/do-bailon-kee-katha/) - लेखक - मुंशी प्रेमचंद झुरी के पास दो बैल थे, जिनका नाम हीरा और मोती था। दोनों बैल बहुत ही हट्टे – कट्टे और आकर्षक थे, काम करने में भी वो बहुत ही फुर्तीले थे। काफी समय से साथ रहते रहते हीरा और मोती अच्छे दोस्त बन गए थे, वो एक ही नाद से चारा - ["आचार संहिता लागू है - कृपया विकाश न करें "](https://myhindagi.com/aacharsanhitalagu/) - हर देश में पर्व मनाए जाते हैं —कहीं दिवाली की दीयों से उजाला होता है, कहीं ईद की सेवइयाँ मिठास घोलती हैं,कहीं क्रिसमस के पेड़ सजते हैं, तो कहीं होली के रंग उड़ते हैं। हर राष्ट्र अपने-अपने त्योहारों में मग्न होता है —कभी धर्म के नाम पर, कभी परंपरा के, और कभी छुट्टी के बहाने। - [✨ मौन की मशाल](https://myhindagi.com/✨-मौन-की-मशाल/) - भूमिका:हर युग की क्रांति में शोर नहीं होता — कभी एक मौन ही होता है जो समय को जगा देता है। यह कविता उन खामोश आंदोलनों, लेखनी की ताकत, और आंतरिक ज्वालाओं को समर्पित है, जो बिना नारे, बिना बगावत के प्रतीक बन जाती हैं। हर काम शोर मचाकर नहीं होता,कुछ काम ख़ामोशी कर जाती - [✍️ बाबा नागार्जुन : जनकवि की कलम, जो व्यंग्य भी थी और वेदना भी](https://myhindagi.com/✍️-बाबा-नागार्जुन-जनकवि-क/) - (जन्म विशेषांक – 30 जून 1911)लेखक – कुन्दन समदर्शी हर काल में कुछ कवि केवल शब्दों के साधक नहीं होते — वे समय के साहसी साक्षी होते हैं।बाबा नागार्जुन ऐसे ही जनकवि थे, जिनकी कविता ने साहित्य को सजाने के बजाय समाज को झकझोरने का कार्य किया।उनकी कविता में भूख की हूक है, क्रांति की - [पंच परमेश्वर ](https://myhindagi.com/पंच-परमेश्वर/) - प्रेमचंद जुम्मन शेख़ और अलगू चौधरी में गाढ़ी मित्रता थी। साझे में खेती होती थी। कुछ लेन-देन में भी साझा था। एक को दूसरे पर अटल विश्वास था। जुम्मन जब हज करने गए थे, तब अपना घर अलगू को सौंप गए थे, और अलगू जब कभी बाहर जाते, तो जुम्मन पर अपना घर छोड़ देते - [नमक का दारोग़ा](https://myhindagi.com/नमक-का-दारोग़ा/) - प्रेमचंद जब नमक का नया विभाग बना और ईश्वर-प्रदत्त वस्तु के व्यवहार करने का निषेध हो गया तो लोग चोरी-छिपे इसका व्यापार करने लगे। अनेक प्रकार के छल-प्रपंचों का सूत्रपात हुआ, कोई घूस से काम निकालता था, कोई चालाकी से। अधिकारियों के पौ-बारह थे। पटवारीगिरी का सर्वसम्मानित पद छोड़-छोड़कर लोग इस विभाग की बर्क़-अंदाज़ी करते - [कफ़न](https://myhindagi.com/कफ़न/) - प्रेमचंद एक झोंपड़े के द्वार पर बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के सामने चुपचाप बैठे हुए थे और अंदर बेटे की जवान बीवी बुधिया प्रसव-वेदना में पछाड़ खा रही थी। रह-रहकर उसके मुँह से ऐसी दिल हिला देने वाली आवाज़ निकलती थी, कि दोनों कलेजा थाम लेते थे। जाड़ों की रात थी, - [उसने कहा था](https://myhindagi.com/उसने-कहा-था/) - ✍️ रचना: चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ (एक)बड़े-बड़े शहरों के इक्के-गाड़ी वालों की ज़बान के कोड़ों से जिनकी पीठ छिल गई है, और कान पक गए हैं, उनसे हमारी प्रार्थना है कि अमृतसर के बंबूकार्ट वालों की बोली का मरहम लगावें। जब बड़े-बड़े शहरों की चौड़ी सड़कों पर घोड़े की पीठ चाबुक से धुनते हुए, इक्के वाले - [पूस की रात](https://myhindagi.com/पूस-की-रात/) - प्रेमचंद हल्कू ने आकर स्त्री से कहा—सहना आया है, लाओ, जो रुपए रखे हैं, उसे दे दूँ, किसी तरह गला तो छूटे। मुन्नी झाड़ू लगा रही थी। पीछे फिरकर बोली—तीन ही तो रुपए हैं, दे दोगे तो कम्मल कहाँ से आवेगा? माघ-पूस की रात हार में कैसे कटेगी? उससे कह दो, फसल पर दे देंगे। - [🕯️ संवेदना का मौन](https://myhindagi.com/🕯️-संवेदना-का-मौन/) - ✍️ कुन्दन समदर्शी कुचल दिए कुछ प्रश्न थे,जो चीखते थे मौन में।कुछ उत्तर थे भीड़ के,जो दब गए समय के शोर में। वेदना लिपटी है मुस्कानों में,जैसे राख में बुझी चिंगारी।कोई देखे तो कह दे — अभिनय है,कोई सुने तो कहे — लाचारी। संवेदना का बाज़ार है,दया यहाँ दामों में बिकती है,आँसू भी अब डिब्बों - [नर हो, न निराश करो मन को](https://myhindagi.com/नर-हो-न-निराश-करो-मन-को/) - ✍️ मैथिलीशरण गुप्त नर हो, न निराश करो मन कोकुछ काम करो, कुछ काम करो जग में रह कर कुछ नाम करोयह जन्म हुआ किस अर्थ अहो समझो जिसमें यह व्यर्थ न होकुछ तो उपयुक्त करो तन को नर हो, न निराश करो मन कोसँभलो कि सुयोग न जाए चला कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भलासमझो - [कविता क्या है?](https://myhindagi.com/कविता-क्या-है/) - ✍️ लेखक — आचार्य रामचंद्र शुक्ल मनुष्य अपने भावों, विचारों और व्यापारों के लिए दिए दूसरों के भावों, विचारों और व्यापारों के साथ कहीं मिलता और कहीं लड़ाता हुआ अंत तक चला चलता है और इसी को जीना कहता है। जिस अनंत-रूपात्मक क्षेत्र में यह व्यवसाय चलता रहता है उसका नाम है जगत्। जब तक - [📝 सेवक – एक लोकतांत्रिक मिथक](https://myhindagi.com/📝-सेवक-एक-लोकतांत्रिक-मि/) - ✍️ कुन्दन समदर्शी जब कोई नेता मंच से गरजकर कहता है – "मैं जनता का सेवक हूँ!",तो ऐसा प्रतीत होता है मानो सिकंदर खुद कह रहा हो – "मैं जूते सिलने आया हूँ!"यह कथन जितना आदर्शवादी और मधुर सुनाई देता है,व्यवहार में उतना ही विरोधाभासी और विडंबनापूर्ण मालूम होता है। आज के नेताओं की ज़ुबान ## Pages - [Home](https://myhindagi.com/home/) - MyHindagi.com – हिंदी कविताएँ, कहानियाँ और जीवन-दर्शन MyHindagi.com पर पढ़िए सुंदर हिंदी कविताएँ, प्रेरणादायक कहानियाँ, जीवन दर्शन और भावनात्मक लेख जो दिल को छू जाएँ। - [Contact Us](https://myhindagi.com/contact-us/) - 📞 संपर्क विवरण 📱 संपर्क नंबर: 9470425622 💬 व्हाट्सएप: 9931147474 📧 ईमेल: kundansamdarshi@gmail.com 📍 वर्तमान पता: रामबाग, पूर्णिया (बिहार) 🏡 स्थायी पता : महथावा, भरगामा, अररिया (बिहार) - [About Us – MyHindagi.com हिंदी साहित्यिक ब्लॉग](https://myhindagi.com/about-us/) - MyHindagi.com पर साहित्य का समर्पित मंच, जहाँ हर रचना जीवन के अनुभवों और संवेदनाओं को जीवंत करती है। ## Categories - [Uncategorized](https://myhindagi.com/category/uncategorized/) - [कविता](https://myhindagi.com/category/कविता/) - [स्वरचित कविताएँ](https://myhindagi.com/category/कविता/स्वरचित-कविताएँ/) - [प्रसिद्ध कवियों की कविताएँ](https://myhindagi.com/category/कविता/प्रसिद्ध-कवियों-की-कविता/) - [निबंध](https://myhindagi.com/category/निबंध/) - [स्वरचित निबंध](https://myhindagi.com/category/निबंध/स्वरचित-निबंध/) - [प्रसिद्ध साहित्यकारों के निबंध](https://myhindagi.com/category/निबंध/प्रसिद्ध-साहित्यकारों-के/) - [कहानी / लघुकथा](https://myhindagi.com/category/कहानी-लघुकथा/) - [प्रसिद्ध कथाकारों की कहानियाँ](https://myhindagi.com/category/कहानी-लघुकथा/प्रसिद्ध-कथाकारों-की-कहा/) - [समीक्षात्मक लेख](https://myhindagi.com/category/समीक्षात्मक-लेख/) - [व्यक्तित्व परिचय – मासिक विशेषांक](https://myhindagi.com/category/व्यक्तित्व-परिचय-मासिक/) - [व्यक्तित्व परिचय – जन्म विशेषांक](https://myhindagi.com/category/व्यक्तित्व-परिचय-जन्म-व/) - [लोककथा एवं नीतिकथाएँ](https://myhindagi.com/category/कहानी-लघुकथा/लोककथा-एवं-नीतिकथाएँ/) - [अन्य विधाएँ](https://myhindagi.com/category/अन्य-विधाएँ/) ## Tags - [Ramdhari singh dinkar](https://myhindagi.com/tag/ramdhari-singh-dinkar/) - [rashtrakavi ramdhari singh dinkar](https://myhindagi.com/tag/rashtrakavi-ramdhari-singh-dinkar/) - [रामधारी सिंह दिनकर का परिचय](https://myhindagi.com/tag/रामधारी-सिंह-दिनकर-का-परि/) - [दिनकर का व्यक्तित्व](https://myhindagi.com/tag/दिनकर-का-व्यक्तित्व/) - [दिनकर](https://myhindagi.com/tag/दिनकर/) - [ओज के कवि](https://myhindagi.com/tag/ओज-के-कवि/) - [हिन्दी साहित्य](https://myhindagi.com/tag/हिन्दी-साहित्य/) - [jindagi](https://myhindagi.com/tag/jindagi/) - [jindagi ke imtihan](https://myhindagi.com/tag/jindagi-ke-imtihan/) - [जिंदगी](https://myhindagi.com/tag/जिंदगी/) - [जिंदगी के इम्तिहान](https://myhindagi.com/tag/जिंदगी-के-इम्तिहान/) - [hindi diwas](https://myhindagi.com/tag/hindi-diwas/) - [bharat kee atma](https://myhindagi.com/tag/bharat-kee-atma/) - [hindi ka mahatwa](https://myhindagi.com/tag/hindi-ka-mahatwa/) - [हिन्दी दिवस](https://myhindagi.com/tag/हिन्दी-दिवस/) - [हिन्दी दिवस का महत्व](https://myhindagi.com/tag/हिन्दी-दिवस-का-महत्व/) - [रामचन्द्र शुक्ल](https://myhindagi.com/tag/रामचन्द्र-शुक्ल/) - [कविता क्या है](https://myhindagi.com/tag/कविता-क्या-है/) - [Ramchandra shukla](https://myhindagi.com/tag/ramchandra-shukla/) - [Nibandh](https://myhindagi.com/tag/nibandh/) - [Kavita kya hai](https://myhindagi.com/tag/kavita-kya-hai/) - [#आचारसंहिता #CodeOfConduct #चुनाव2025 #ElectionCommission #ModelCodeOfConduct #लोकतंत्र #विकासपररोक #चुनावीआचारसंहिता #निर्वाचन_आयोग #सतर्क_शासन](https://myhindagi.com/tag/आचारसंहिता-codeofconduct-चुनाव2025-electioncommission-modelcodeofconduct/) - [प्रेमचंद](https://myhindagi.com/tag/प्रेमचंद/) - [मुंशी प्रेमचंद](https://myhindagi.com/tag/मुंशी-प्रेमचंद/) - [प्रेमचंद का जीवन](https://myhindagi.com/tag/प्रेमचंद-का-जीवन/) - [प्रेमचंद का साहित्य](https://myhindagi.com/tag/प्रेमचंद-का-साहित्य/) - [हिंदी कथा साहित्य](https://myhindagi.com/tag/हिंदी-कथा-साहित्य/) - [हिंदी साहित्य के युगपुरुष](https://myhindagi.com/tag/हिंदी-साहित्य-के-युगपुरु/) - [महाप्राण निराला](https://myhindagi.com/tag/महाप्राण-निराला/) - [सूर्यकांत त्रिपाठी निराला](https://myhindagi.com/tag/सूर्यकांत-त्रिपाठी-निराल/) - [हिंदी साहित्य](https://myhindagi.com/tag/हिंदी-साहित्य/) - [छायावाद](https://myhindagi.com/tag/छायावाद/) - [निराला की कविताएँ](https://myhindagi.com/tag/निराला-की-कविताएँ/) - [सरोज स्मृति](https://myhindagi.com/tag/सरोज-स्मृति/) - [वह तोड़ती पत्थर](https://myhindagi.com/tag/वह-तोड़ती-पत्थर/) - [राम की शक्ति पूजा](https://myhindagi.com/tag/राम-की-शक्ति-पूजा/) - [आधुनिक हिंदी साहित्य](https://myhindagi.com/tag/आधुनिक-हिंदी-साहित्य/) - [MyHindagi](https://myhindagi.com/tag/myhindagi/) - [हिन्दी कहानी](https://myhindagi.com/tag/हिन्दी-कहानी/) - [काबुलीवाला](https://myhindagi.com/tag/काबुलीवाला/) - [रवीन्द्रनाथ टैगोर](https://myhindagi.com/tag/रवीन्द्रनाथ-टैगोर/) - [दो बैलों की कथा](https://myhindagi.com/tag/दो-बैलों-की-कथा/) - [जिंदगी की कविता](https://myhindagi.com/tag/जिंदगी-की-कविता/) - [जीवन दर्शन](https://myhindagi.com/tag/जीवन-दर्शन/) - [कुन्दन समदर्शी](https://myhindagi.com/tag/कुन्दन-समदर्शी/) - [जिंदगी के दो चेहरे](https://myhindagi.com/tag/जिंदगी-के-दो-चेहरे/) - [प्रेरक कविता](https://myhindagi.com/tag/प्रेरक-कविता/) - [chehre jindagi ke](https://myhindagi.com/tag/chehre-jindagi-ke/) - [चेहरे जिंदगी के](https://myhindagi.com/tag/चेहरे-जिंदगी-के/) - [चुनावी व्यंग्य](https://myhindagi.com/tag/चुनावी-व्यंग्य/) - [राजनीतिक व्यंग्य](https://myhindagi.com/tag/राजनीतिक-व्यंग्य/) - [चुनाव प्रचार](https://myhindagi.com/tag/चुनाव-प्रचार/) - [चुनावी वादे](https://myhindagi.com/tag/चुनावी-वादे/) - [भारतीय राजनीति](https://myhindagi.com/tag/भारतीय-राजनीति/) - [व्यंग्य लेख](https://myhindagi.com/tag/व्यंग्य-लेख/) - [चुनाव परिणाम](https://myhindagi.com/tag/चुनाव-परिणाम/) - [समसामयिक व्यंग्य](https://myhindagi.com/tag/समसामयिक-व्यंग्य/) - [हिंदी व्यंग्य](https://myhindagi.com/tag/हिंदी-व्यंग्य/) - [गोनू झा](https://myhindagi.com/tag/गोनू-झा/) - [गोनू झा की पहलवानी](https://myhindagi.com/tag/गोनू-झा-की-पहलवानी/) - [गोनू झा की कुश्ती](https://myhindagi.com/tag/गोनू-झा-की-कुश्ती/) - [जीवन और संबंध](https://myhindagi.com/tag/जीवन-और-संबंध/) - [प्रेम और संवेदना](https://myhindagi.com/tag/प्रेम-और-संवेदना/) - [हिन्दी निबंध](https://myhindagi.com/tag/हिन्दी-निबंध/) - [भावनात्मक चिंतन](https://myhindagi.com/tag/भावनात्मक-चिंतन/) - [सम्बन्धों का सत्य](https://myhindagi.com/tag/सम्बन्धों-का-सत्य/) - [आधुनिक रिश्ते](https://myhindagi.com/tag/आधुनिक-रिश्ते/) - [क्या भूलूं क्या याद करूं](https://myhindagi.com/tag/क्या-भूलूं-क्या-याद-करूं/) - [बच्चन की रचनाएँ](https://myhindagi.com/tag/बच्चन-की-रचनाएँ/) - [हिंदी ब्लॉग](https://myhindagi.com/tag/हिंदी-ब्लॉग/) - [हिंदी कविता](https://myhindagi.com/tag/हिंदी-कविता/) - [हरिवंश राय बच्चन](https://myhindagi.com/tag/हरिवंश-राय-बच्चन/) - [अनुभूति के कवि](https://myhindagi.com/tag/अनुभूति-के-कवि/) - [मुल्ला नसीरुद्दीन की जादूगरी](https://myhindagi.com/tag/मुल्ला-नसीरुद्दीन-की-जाद/) - [मुल्ला नसीरुद्दीन](https://myhindagi.com/tag/मुल्ला-नसीरुद्दीन/) - [अकबर और बीरबल](https://myhindagi.com/tag/अकबर-और-बीरबल/) - [आधी चादर का न्याय](https://myhindagi.com/tag/आधी-चादर-का-न्याय/) - [लोककथा](https://myhindagi.com/tag/लोककथा/) - [न्याय पर कहानी](https://myhindagi.com/tag/न्याय-पर-कहानी/) - [बीरबल की बुद्धि](https://myhindagi.com/tag/बीरबल-की-बुद्धि/) - [प्रेरणादायक कथाएँ](https://myhindagi.com/tag/प्रेरणादायक-कथाएँ/) - [नैतिक शिक्षा](https://myhindagi.com/tag/नैतिक-शिक्षा/) - [मुल्ला नसरुद्दीन](https://myhindagi.com/tag/मुल्ला-नसरुद्दीन/) - [प्रेरक कहानियाँ](https://myhindagi.com/tag/प्रेरक-कहानियाँ/) - [संस्कृति](https://myhindagi.com/tag/संस्कृति/) - [बच्चों की कहानी](https://myhindagi.com/tag/बच्चों-की-कहानी/) - [पंचतंत्र कहानी](https://myhindagi.com/tag/पंचतंत्र-कहानी/) - [रंगे सियार](https://myhindagi.com/tag/रंगे-सियार/) - [नैतिक कथा](https://myhindagi.com/tag/नैतिक-कथा/) - [डिजिटल युग](https://myhindagi.com/tag/डिजिटल-युग/) - [तकनीक_और_समाज](https://myhindagi.com/tag/तकनीक_और_समाज/) - [मानव_संबंध](https://myhindagi.com/tag/मानव_संबंध/) - [मशीन_और_मनुष्य](https://myhindagi.com/tag/मशीन_और_मनुष्य/) - [आधुनिक जीवन](https://myhindagi.com/tag/आधुनिक-जीवन/) - [भारतीय लेखक](https://myhindagi.com/tag/भारतीय-लेखक/) - [रामवृक्ष बेनीपुरी](https://myhindagi.com/tag/रामवृक्ष-बेनीपुरी/) - [कलम के जादूगर](https://myhindagi.com/tag/कलम-के-जादूगर/) - [भारतीय संस्कृति](https://myhindagi.com/tag/भारतीय-संस्कृति/) - [राष्ट्रकवि](https://myhindagi.com/tag/राष्ट्रकवि/) - [मैथिलीशरण गुप्त](https://myhindagi.com/tag/मैथिलीशरण-गुप्त/) - [नव वर्ष कविता](https://myhindagi.com/tag/नव-वर्ष-कविता/) - [बसंत पर कविता](https://myhindagi.com/tag/बसंत-पर-कविता/) - [समकालीन हिंदी कविता](https://myhindagi.com/tag/समकालीन-हिंदी-कविता/) - [दार्शनिक कविता](https://myhindagi.com/tag/दार्शनिक-कविता/) - [पंचतंत्र की कहानी](https://myhindagi.com/tag/पंचतंत्र-की-कहानी/) - [नीति कथा](https://myhindagi.com/tag/नीति-कथा/) - [कछुआ ओर हंस](https://myhindagi.com/tag/कछुआ-ओर-हंस/) - [मानवीय संवेदना](https://myhindagi.com/tag/मानवीय-संवेदना/) - [हिंदी निबंध](https://myhindagi.com/tag/हिंदी-निबंध/) - [छायावाद के स्तंभ](https://myhindagi.com/tag/छायावाद-के-स्तंभ/) - [जयशंकर प्रसाद](https://myhindagi.com/tag/जयशंकर-प्रसाद/) - [जयशंकर प्रसाद का साहित्य](https://myhindagi.com/tag/जयशंकर-प्रसाद-का-साहित्य/) - [जीवन की यात्रा](https://myhindagi.com/tag/जीवन-की-यात्रा/) - [समय और रिश्ते](https://myhindagi.com/tag/समय-और-रिश्ते/) - [भागती ज़िन्दगी](https://myhindagi.com/tag/भागती-ज़िन्दगी/) - [आधुनिक हिंदी कविता जीवन बोध](https://myhindagi.com/tag/आधुनिक-हिंदी-कविता-जीवन-ब/) - [संस्मरण](https://myhindagi.com/tag/संस्मरण/) - [रेलयात्रा](https://myhindagi.com/tag/रेलयात्रा/) - [जीवन सीख](https://myhindagi.com/tag/जीवन-सीख/) - [मुक्तछंद के कवि](https://myhindagi.com/tag/मुक्तछंद-के-कवि/) - [निराला का साहित्य](https://myhindagi.com/tag/निराला-का-साहित्य/) - [भूख](https://myhindagi.com/tag/भूख/) - [दो जून की रोटी](https://myhindagi.com/tag/दो-जून-की-रोटी/) - [गरीबी](https://myhindagi.com/tag/गरीबी/) - [कबीर](https://myhindagi.com/tag/कबीर/) - [संत कबीर](https://myhindagi.com/tag/संत-कबीर/) - [कबीरदास](https://myhindagi.com/tag/कबीरदास/) - [कबीर का व्यक्तित्व](https://myhindagi.com/tag/कबीर-का-व्यक्तित्व/) - [कबीर का मूल्यांकन](https://myhindagi.com/tag/कबीर-का-मूल्यांकन/) - [निर्गुण भक्ति](https://myhindagi.com/tag/निर्गुण-भक्ति/) - [कथा सम्राट](https://myhindagi.com/tag/कथा-सम्राट/) - [उपन्यास सम्राट](https://myhindagi.com/tag/उपन्यास-सम्राट/) - [कलम का सिपाही](https://myhindagi.com/tag/कलम-का-सिपाही/) - [hindi](https://myhindagi.com/tag/hindi/) - [हिंदी](https://myhindagi.com/tag/हिंदी/) - [हिंदी दिवस](https://myhindagi.com/tag/हिंदी-दिवस/) - [हिंदी संस्कृति](https://myhindagi.com/tag/हिंदी-संस्कृति/) - [स्वरचित निबंध](https://myhindagi.com/tag/स्वरचित-निबंध/) - [रामधारी सिंह दिनकर](https://myhindagi.com/tag/रामधारी-सिंह-दिनकर/) - [वीर रस के कवि](https://myhindagi.com/tag/वीर-रस-के-कवि/)